एक घना वृक्ष
और मैं छाया तुम्हारी
एक अजीब सी शांति है तुम्हारे तले
जो तुमने फूलों का जाल बिछाया है,
शूल चुभते नहीं,
तुम,
समुद्र हो विशाल
मेरा सारा दर्द, सारी पीड़ा,
पी गए हो तुम,
तुम्हारा प्यार ही अब मेरा श्रृंगार है...
तुम्हारा प्यार ही अब जीने का आधार है...
सम्बन्ध आत्मा का है,
तरंगे दोनों के दिलों में उठ रही हैं,
बस इतना करना कि,
मुझे कभी खुद से अलग नहीं करना |

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