बुधवार, 21 मार्च 2012

मौन शब्द

कोई हलचल नहीं है अंतर्मन में अब...
सारे शब्द मौन में समा गए हैं.....
घडी की टिक टिक....और..... दूरीयाँ बढती जा रही हैं..
..और... मौन, 
शब्दों से बातें कर रहा है अब।


3 टिप्‍पणियां:

  1. कल 11/05/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया यशवंत जी!
      अलका शर्मा

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    2. बहुत अच्छा होगा अगर आप साथ में इस बारे में कोई विशेष टिप्पणी भी दे सकें, कविता के बारे में.
      धन्यवाद्!

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