मंगलवार, 13 मार्च 2012

आज फिर आ जाओ मां!

आज फिर आ जाओ मां
मुझे, फिर से,
सुला जाओ मां,
जाने कहां गुम हो गाय,
टुकडा  मेरी नींद का
प्रयास अभी तक जारी है,
 
मेरे हिस्से की नींद
ढूंढ रही हूँ मैं...
कहीं पढ़ा था ..
कि माँ, ममता कि मञ्जूषा होती है .
 
एक बार फिर से अपनी आँचल कि छावं में...
एक बार फिर से ममता कि नावं में....
हिलोरें भर लेने दो माँ ..
 
आज फिर आ जाओ मां
मुझे, फिर से,
सुला जाओ मां..|
 

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