बुधवार, 7 दिसंबर 2011

रैन-बसेरा

उस दिन
चिलचिलाती धूप में ..
हलक सूख रहा था...
बेरुखे मौसम ने,
बहुत सताया,

... मन चाहा,
चलो चलते हैं
एक छोटी सी
छावं बुन लेते हैं....
 
दो तिनके तुम्हारे...दो हमारे
मैं एक पेड़ लगाऊँगी जामुन का
तुम छोटी सी नदी ले आना
एक छोटा सा रैन-बसेरा
हमारा तुम्हारा...........!!

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