बुधवार, 24 अगस्त 2011

जागो भारतवासी जागो !!


जागो भारतवासी जागो !!
अपने अधिकारों को पहचानो ....

घोटालों में देश डूब चुका है,
तानाशाही से ऊब चुका है,
तिनका तिनका कर के यारों,
सब्र का प्याला पूर चुका है




बेड़ी में जकड़ी भारत माता,
माँ को ये सब रास न आता
क्या यही स्वप्न था दीवानों का,
आज़ादी के मतवालों का..??

कब तक अंधेरों में नहाते रहोगे,
सूखे सहरों में दरिया बहते रहोगे?
गर हिम्मत है देश के लिए कुछ कर गुजरने की,
कब तक औरों को आजमाते रहोगे ?

भ्रष्टों ने लूटा है देश को,कब तक यूँ हम पिसते रहेंगे?
छल,कपट,धोखाधड़ी से,दामन अपना घिसते रहेंगे?
गाँधी,सुभाष,नेहरु और भगत सिंह के सपनों को,
बेच के जेबें भरते रहेंगे ...........?????

...
आगे आओ, हाथ बढाओ यारों ...
चलो अँधेरे को उजाले में बदल डाला जाये
जिसकी खुशबू से महक जाये सारा हिन्दुस्तान
ऐसा कोई गुल खिलाया जाये ....

जागो भारतवासी जागो !! 

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