पढने में जब मन नहीं लगा
चलो कोई बात नहीं.........
घर की खेती है,
संभल जायेगा.......
बापू पीकर पड़ा है ...
अपनी ही जिद पर अड़ा है ...
क्या कल जायेगा काम पर ?
मालूम नहीं..............
मालिक है ...उसकी मर्जी
अम्मा की आँखे सूजी हैं
जाने कितने बरस बीते....
थकी नहीं अब तक चूल्हा फूंकते ...
पर किसे परवाह है ....
लगी रहो अम्मा ...लगी रहो
रोटी तो पेट की जरूरत है
रोज चाहिए ......चाहे अम्मा बचे या नहीं
मुनिया की भी किसे परवाह है ?
लड़की ठहरी ....
उसमे खुश होने वाली कौन सी बात है?
सूनी आँखों में जाने कितने सपने बसे हैं
क्या उससे पुछा कभी किसी ने ....
बिटिया क्या तेरे भी कुछ अरमान हैं ?
पड़ी रहो मुनिया
जब तक अपने घर नहीं चली जाती ...
भैया बापू और सारे आदमी
यूँ कहो की सारा गाँव ही ....
पैर की जूती समझे है औरतों को
क्या औरत होना पाप है ?
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